छोटा बच्चा इसलिए भी रोता है पढ़िए इसके ठोस कारण

दिल्ली, छोटा बच्चा (baby) हंसता हुआ तो हर किसी को अच्छा लगता है परंतु बच्चा जरा सा भी रोए तो मां ही नहीं बल्कि बाकी लोग भी परेशान हो जाते हैं। खास तौर पर जो नई मां ज्यादा परेशान हो जाती हैं और उन्हें यह समझ ही नहीं आता कि उनका लाडला इतना रो क्यों रहा है।

वास्तव में छोटा बच्चा रोकर अपनी मां (mother) को यह बताने का प्रयास करता है कि उसे कोई प्रॉब्लम है। छोटे बच्चे बहुत ही नाजुक होते हैं तथा उन पर मौसम का असर भी जल्द ही होता है। उन्हें बहुत जल्दी ठंड तो बहुत जल्दी गर्मी भी लगने लगती है। यह भी एक कारण है कि वह रोने लगते हैं। ज्यादातर बच्चे भूख लगने के कारण से भी रोते हैं इसलिए उन्हें थोड़े-थोड़े समय के अंतरकाल में दूध पिलाती रहें नहीं तो उन्हें कॉलिक अर्थात पेट में गैस बनने की समस्या हो जाती है। जिस कारण से वे रोते हैं। ऐसे मेंआपको वह सारे कारण पता होनी चाहिए जिस कारण से बच्चे रोते।

न्यू बोर्न बेबी (new born baby) भूख लगने के कारण सबसे ज्यादा रोते हैं क्योंकि उनका पेट छोटा होता है। इसी वजह से उन्हें एक बार में दूध नहीं पिलाया जा सकता तथा उन्हें थोड़े-थोड़े समय बाद दूध पिलाने की जरूरत पड़ती है।

छोटे बच्चे गीली नैपी में असहज महसूस करते हैं। वैसे भी ज्यादा देर तक बच्चों को गीली नैपी में रखने से उन्हें रैशेज हो जाते हैं, जिसकी वजह से वे बहुत रोते हैं। जब भी बच्चों को नैपी पहनाए तो समय-समय पर चेक करते रहें कि नैपी गीली तो नहीं है और गीली होने पर तुरंत बदल दें।

नवजात शिशु को मां का शारीरिक स्पर्श अच्छा लगता है, वह हमेशा मां के सीने से चिपक का रहना चाहता है। कभी-कभी वह गोद में आने के लिए भी रोता है तथा मां द्वारा गोद में लेने पर उससे अपनेपन का एहसास होता।

3 सप्ताह से लेकर 3 महीने तक के बच्चों में कॉलक की समस्या सबसे ज्यादा रहती है। अर्थात पेट में गैस बनती है जिसकी वजह से बच्चे रोते हैं। कभी-कभी किसी तरह की एलर्जी और कीड़े-मकोड़े के काटने की वजह से भी बच्चे रोते हैं।

नींद पूरी नहीं होने पर
बच्चों की नींद पूरी नहीं होने पर भी वे चिड़ेचिड़े स्वभाव के हो जाते हैं और रोने लगते हैं। इसलिए उन्हें शांति माहौल में सुलाने की कोशिश करें।

थकान होने पर
कई बार बच्चे थके होते हैं जिसकी वजह से उन्हें नींद नहीं आती है और वे रोते रहते हैं।

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